केेंद्र के साथ लेह अपेक्स बॉडी ने वार्ता से किया इनकार, एंटी-नेशनल टिप्पणी के लिए माफी की मांग


 नई दिल्ली/लेह. लेह अपेक्स बॉडी ने सोमवार 29 सितम्बर को घोषणा की कि वह केंद्र सरकार के साथ आगामी वार्ता में हिस्सा नहीं लेगी. एलएबी ने मांग की है कि 24 सितंबर को हुई गोलीबारी की निष्पक्ष न्यायिक जांच की जाए, जिसमें चार लोग मारे गए और करीब 90 लोग घायल हुए. 

इस वार्ता का अगला दौर 6 अक्टूबर को निर्धारित था. एलएबी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) ने केंद्र से माफी की मांग की है, जिन्होंने लद्दाखी प्रदर्शनकारियों को एंटी-नेशनल और पाकिस्तान के हाथ में खेलने वाला बताया था. दोनों संगठन लद्दाख के राज्यत्व और संवैधानिक सुरक्षा (सिक्स्थ शेड्यूल) की मांगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

सरकार की नीतियों पर सवाल

केडीए के नेता सज्जाद कारगिली ने कहा कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई और गोलीबारी में घायल लोगों की संख्या इस बात का उदाहरण है कि लोकतंत्र में जवाबदेही कितनी जरूरी है. उन्होंने निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग की. लेह में प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी ने क्षेत्र में आक्रोश को और बढ़ा दिया है.

सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी से बढ़ा आक्रोश

एनएसए के तहत गिरफ्तार वांगचुक को जोधपुर जेल में स्थानांतरित किया गया है. उनके समर्थकों का कहना है कि उनकी गिरफ्तारी ने लद्दाख के संघर्ष को पूरे देश में प्रमुख बना दिया है. वांगचुक की पत्नी गितांजलि अंगमो ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि उनका आंदोलन पूरी तरह से अहिंसक था और हिंसा तब शुरू हुई जब सीआरपीएफ ने कार्रवाई की.

लद्दाख की मांगों को नजरअंदाज करना होगा खतरनाक

एलएबी और केडीए ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि लद्दाख की राज्यत्व और संवैधानिक सुरक्षा की मांगों की अनदेखी की गई, तो इससे लोगों में असंतोष और अलगाव की भावना बढ़ रही है. कारगिली ने कहा, लद्दाख के लोग इस देश की ताकत हैं, उन्हें दीवार के किनारे पर नहीं धकेलना चाहिए.

केंद्रशाषित बनने से नहीं हुआ फायदा

2019 में अनुच्छेद 370 रद्द होने के बाद लद्दाख को यूटी बनाया गया था, लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया ने लोगों की आकांक्षाओं को पूरा नहीं किया.

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