मतदाता सूची की महासफाई का बिगुल, 69 हजार घरों की दहलीज पर BLO की दस्तक से मची खलबली

 

जबलपुर. संस्कारधानी जबलपुर में 23 दिसंबर 2025 की सुबह से लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण 'सफाई' का एक बड़ा अध्याय शुरू हो गया है. निर्वाचन आयोग के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) अभियान के तहत जिला प्रशासन ने उन 69 हजार मतदाताओं को चिन्हित किया है, जिनकी पहचान संदिग्ध पाई गई है या जो बार-बार सत्यापन के बावजूद अपने पते पर उपलब्ध नहीं मिले हैं. आज से बूथ लेवल ऑफिसर्सने हाथ में नोटिस थामकर इन हजारों मतदाताओं के घरों की ओर कूच कर दिया है, जिससे शहर के मोहल्लों और गलियों में एक अजीब सी हलचल और जिज्ञासा का माहौल है. जनता के मन में यह सवाल कौंध रहा है कि क्या सालों से जिस पहचान के साथ वे वोट डालते आए हैं, वह अब एक नोटिस के जरिए संकट में पड़ने वाली है या फिर यह मतदाता सूची को पारदर्शी बनाने की महज एक प्रशासनिक प्रक्रिया है.

इस महा-अभियान की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिन 69 हजार लोगों को नोटिस दिया जा रहा है, उनमें बड़ी संख्या ऐसे नामों की है जो या तो शहर छोड़ चुके हैं, मृत हो चुके हैं या फिर एक ही पते पर दोहरी प्रविष्टि के रूप में दर्ज हैं. निर्वाचन कार्यालय से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, यह अभियान मध्य प्रदेश की मतदाता सूची को 'त्रुटिहीन' बनाने के उस व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है, जिसके तहत पूरे प्रदेश से करीब 41 लाख नाम हटाए जाने की प्रक्रिया चल रही है. जबलपुर संभाग के मतदाता इस बात को लेकर बेहद उत्सुक हैं कि क्या इस जांच के बाद उनके वोट देने के अधिकार पर कोई आंच आएगी. बीएलओ जब घर पहुंच रहे हैं, तो लोग अपनी पहचान के दस्तावेज दिखाने और स्पष्टीकरण देने में जुटे हैं. जिज्ञासा इस बात को लेकर भी है कि यदि कोई मतदाता घर पर नहीं मिलता, तो क्या उसका नाम सीधे काट दिया जाएगा या उसे अपना पक्ष रखने का एक और मौका मिलेगा.

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