आनंद मुस्लिम समुदाय के लिए दफन सेवाएं प्रदान करने हेतु गुस्ल वैन खोली गई

 

रिपोर्ट: जाकिर अली सैयद- आज आणंद शहर के लिम्बों वाला स्कूल के प्रांगण में गुस्ल वैन खोली गई। आणंद मुस्लिम समुदाय में शव को दफनाने से पहले स्नान कराया जाता है। शरीर और योनि को साफ करने की प्रक्रिया को गुस्ल कहते हैं। यह प्रक्रिया अधिकतर घरों में की जाती है, लेकिन कुछ मामलों में घर के छोटे आकार या अपार्टमेंट में रहने वाले लोगों के कारण यह चिंता का विषय बन जाता है। विशेषकर महिलाओं के लिए शव को गुस्ल देने को लेकर असमंजस की स्थिति रहती है। इस ग़ुस्ल वैन को शहर के सभी इलाकों में आसानी से पार्क किया जा सकता है। यह वैन कफन किट, हैंड आरी, हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म, ठंडे और गर्म पानी की सुविधाओं से भी सुसज्जित है, जिससे अब शव को गुस्ल देना आसान हो जाएगा। 

यह गुस्ल वैन आणंद शहर के हाजी जावेदभाई उस्मानगनी मेमन (चूड़ी वाला) और हाजी मोहम्मदशाह मोतीशा दीवान के सहयोग से तैयार की गई है, जो आणंद के मुस्लिम समुदाय को 24 घंटे मुफ्त सेवा प्रदान करेगी। मृतक को गुस्ल देने के लिए भी एक टीम तैयार की जाएगी, जो सेवा कार्य करेगी। आज रविवार 20 अप्रैल को प्रातः 11 बजे आणंद शहर के वार्ड क्रमांक 6 में पुरानी पानी की टंकी के पास लिम्बोनवाला स्कूल के प्रांगण में यह गुस्ल वैन खोली गई, जिसे देखने व समझने के लिए बड़ी संख्या में आणंद मुस्लिम समुदाय के लोग पहुंचे। आज से इस वैन का उपयोग मुस्लिम समुदाय के मृतकों के लिए किया जाएगा। 

हाजी जावेदभाई उस्मानगानी मेमन (चूड़ी धारक) और हाजी मोहम्मदशाह मोतीशा दीवान ने मुस्लिम समुदाय के लिए मृतकों को कब्रिस्तान तक ले जाने के लिए "सफर-ए-आखिरत वैन" भी स्थापित की है। अब मृतक गुस्ल वैन मुस्लिम समुदाय के लिए अधिक उपयोगी होगी। 

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