जबलपुर मेडिकल कॉलेज बना सेंट्रल इंडिया का कैंसर हब, झारखंड उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ से भी मरीज इलाज के लिए पहुँच रहे


 जबलपुर, नगर संवाददाता. नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज, जबलपुर ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है. कैंसर जैसे जटिल रोग के उपचार में मिली सफलता ने इसे पूरे मध्य भारत का प्रमुख चिकित्सा केंद्र बना दिया है. अब यह मेडिकल कॉलेज “सेंट्रल इंडिया का कैंसर हब” कहलाने लगा है, जहाँ न सिर्फ मध्य प्रदेश बल्कि झारखंड, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ से भी कैंसर मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं.

पिछले कुछ महीनों में कॉलेज के ऑन्कोलॉजी विभाग ने 300 से अधिक मरीजों को नया जीवन दिया है. इनमे ब्रेस्ट और थायरॉइड कैंसर जैसे कठिन मामलों की सफल सर्जरी शामिल हैं. डॉक्टरों के अनुसार यहाँ हर महीने दर्जनों मरीजों का आधुनिक तकनीक से उपचार किया जा रहा है. सबसे अहम बात यह है कि यहाँ का इलाज निजी अस्पतालों की तुलना में बेहद कम खर्चीला है, जिससे गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों को भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा मिल पा रही है.

हाल ही में 17 वर्षीय युवती में ब्रेस्ट कैंसर का मामला सामने आने से समाज में चिंता और जागरूकता दोनों बढ़ी हैं. डॉक्टरों ने इस जटिल केस की सर्जरी पूरी तरह सफलतापूर्वक की. प्रमुख सर्जन डॉ. विनय मिश्रा ने बताया कि “कम उम्र में कैंसर का पता चलना चौंकाने वाला था, लेकिन आधुनिक तकनीक और टीमवर्क की बदौलत यह ऑपरेशन सफल रहा. अब रोगी पूरी तरह स्वस्थ है.”

कॉलेज के डीन डॉ. पी.के. कासटे ने कहा कि मेडिकल कॉलेज को कैंसर उपचार के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए आधुनिक उपकरण, नई रेडियोथैरेपी यूनिट और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार कार्यरत है. उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य है कि कोई भी मरीज पैसों की कमी के कारण इलाज से वंचित न रहे. सरकारी अस्पताल भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधा दे सकते हैं — जब उनमें इच्छाशक्ति और संसाधन दोनों हों.”

मेडिकल कॉलेज की इस उपलब्धि ने सोशल मीडिया पर भी व्यापक प्रतिक्रिया पाई है. नागरिक जबलपुर के डॉक्टरों की प्रशंसा करते हुए उन्हें “जनसेवा का उदाहरण” बता रहे हैं. फेसबुक और एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लोग लिख रहे हैं — “यह साबित हो गया कि सरकारी डॉक्टर अगर चाहें तो देश का चेहरा बदल सकते हैं.”
यूट्यूब पर जारी एक वीडियो में मरीजों के परिजन भावुक होकर कहते दिखाई दे रहे हैं — “हमें लगा था इलाज महंगा होगा, लेकिन यहाँ न केवल सस्ता बल्कि बेहतरीन इलाज मिला.”

जबलपुर अब स्वास्थ्य सेवाओं का एक उम्मीद भरा केंद्र बनकर उभर रहा है. प्रतिदिन लगभग 200 से अधिक मरीज कैंसर जांच और उपचार के लिए यहाँ पहुँच रहे हैं. कॉलेज प्रशासन के अनुसार, आने वाले समय में एक नया रीजनल कैंसर रिसर्च सेंटर स्थापित करने की योजना है, जिससे पूरे मध्य भारत में कैंसर रिसर्च और ट्रीटमेंट को नई दिशा मिलेगी.

मेडिकल कॉलेज की टीम अब ग्रामीण इलाकों में भी “अर्ली डिटेक्शन कैंपेन” चला रही है. डॉक्टरों का मानना है कि जागरूकता ही कैंसर के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार है. ब्रेस्ट और थायरॉइड कैंसर की समय पर जांच से अधिकांश मामलों में जीवन बचाया जा सकता है. डॉ. मिश्रा का कहना है, “हम लोगों से अपील करते हैं कि छोटे लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें. समय रहते जांच कराना ही सबसे बड़ा बचाव है.”

जबलपुर मेडिकल कॉलेज की यह उपलब्धि सिर्फ एक चिकित्सा सफलता नहीं, बल्कि एक सामाजिक संदेश भी है — कि सरकारी संस्थान भी उत्कृष्टता के प्रतीक बन सकते हैं. राज्य स्वास्थ्य विभाग ने कॉलेज की टीम की सराहना करते हुए इसे पूरे प्रदेश में “मॉडल प्रोजेक्ट” के रूप में लागू करने की बात कही है.

सोशल मीडिया पर लोग इस सफलता को साझा करते हुए लिख रहे हैं — “यह सिर्फ इलाज नहीं, उम्मीद की कहानी है.” कैंसर जैसे गंभीर रोग के खिलाफ यह पहल समाज में नई चेतना ला रही है.

जबलपुर मेडिकल कॉलेज ने साबित किया है कि समर्पण, तकनीक और मानवीय संवेदना मिलकर न सिर्फ रोग बल्कि भय को भी हरा सकते हैं.
आज जबलपुर केवल इलाज का केंद्र नहीं रहा — यह पूरे सेंट्रल इंडिया का “जीवन का नया प्रतीक” बन गया है.

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