रिलांयस के पॉवर प्रोजेक्ट से हो रही जमीन बंजर, हाईकोर्ट ने दिए जांच के आदेश

 

जबलपुर. रिलांयस के सासन पॉवर प्रोजेक्ट से ना सिर्फ किसानों की जमीन बंजर हो रही है. बल्कि आसपास के गांव का पानी दूषित हो रहा है, जिसके ग्रामीण बीमार हो रहे हैं. बार-.बार शिकायत करने के बाद भी जब प्रशासन ने इस और ध्यान नहीं दिया तो परेशान किसानों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रामकुमार चौबे की डिवीजन बेंच ने सुनवाई करते हुए सिंगरौली कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ सहित अन्य को निर्देश दिए हैं कि मौके पर जाकर निरीक्षण किया जाए और 45 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करें.

सिंगरौली जिले के ग्राम हर्रहवा गांव के पास 2010 में रिलायंस का सासन पॉवर प्रोजेक्ट लगाए जिससे रोजाना 1800 मैगावाट बिजली का उत्पादन किया जाता है. इसी प्रोजेक्ट के ऐश डैम से लगातार जहरीले पानी का रिसाव हो रहा है. यह 16 एकड़ से अधिक किसानों की जमीन पर सीधे जा रहा है. रिसाव से जमीने बंजर होने लगी. लोग पानी पीने से बीमार होने लगे. ग्रामीणों ने 2015 में सिंगरौली जिले के कलेक्टर को लिखित में शिकायत दीए तो उन्होंने तहसीलदार को मौके पर भेजकर जांच रिपोर्ट मांगी. इसमें भी पाया गया कि रिलायंस के प्रोजेक्ट से जमीन और फसल दोनों बर्बाद हो रही है.

सिंगरौली के तत्कालीन कलेक्टर ने शिकायत के आधार पर निर्दश दिए कि पीडि़त किसानों को फसल खराब होने का मुआवजा 25-25 हजार रुपए का दिया जाए. इसे ग्रामीणों ने बहुत कम बताया. 2017 में किसानों ने एनजीटी में शिकायत की, जिसके बाद प्रदूषण बोर्ड को जांच के आदेश दिए गए. जांच में पाया गया कि रिलायंस कंपनी से निकल रही राख और पानी से जमीन बंजर हो रही है. 2020 में एनजीटी ने डिटेल ऑर्डर दिया. जिसमें कहा कि किसानों को नुकसान हुआ है, जहां नुकसानी राशि 48 लाख रुपए किसानों को मिला. एनजीटी ने यह भी आदेश दिए कि डैम से हो रहे लीकेज को रोका जाए.

एनजीटी के द्बारा दिए गए निर्देशों के बाद भी रिलायंस के सासन पावर प्रोजेक्ट के ऐश डैम में हो रहा रिसाव जब नहीं रुका तो 2022 में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई. जिसमें सुनवाई के दौरान सिंगरौली कलेक्टर सहित अन्य को नोटिस जारी किया गया. दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट जस्टिस विवेक मिश्रा और जस्टिस रामकुमार चौबे की डिवीजन बेंच ने फाइनल ऑर्डर देते हुए कहा कि 2020 का एनजीटी ऑर्डर के अनुरूप ही नुकसानी राशि को दिया जाए जो 2020 से नहीं दी गई है.

हाईकोर्ट ने सिंगरौली कलेक्टर को निर्देश दिए है कि जिला पंचायत सीईओ, एसडीएम, ग्राम पंचायत व सचिव सहित याचिकाकर्ता और ग्रामीणों की उपास्थिति में मौके पर जाकर स्पॉट निरीक्षण किया जाएए और रिपोर्ट को 45 दिनों में कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की जाए. इस दौरान प्रदूषण बोर्ड के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे.

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