मेडिकल कॉलेज परिसर में काले रंग की पजेरो से मचा हड़कंप, पिस्टल के साथ दबोचे गए नरसिंहपुर के दो युवक

 


जबलपुर. सबसे व्यस्त और संवेदनशील इलाकों में शुमार मेडिकल कॉलेज परिसर उस समय अचानक छावनी में तब्दील हो गया, जब सूचना मिली कि एक आलीशान काले रंग की पजेरो कार में सवार कुछ युवक हथियार लहराते हुए घूम रहे हैं. यह सनसनीखेज वाकया गढ़ा थाना क्षेत्र के न्यूरो सर्जन विभाग के समीप का है, जहाँ मरीजों और उनके परिजनों की भारी भीड़ के बीच इस संदिग्ध वाहन की मौजूदगी ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे. जैसे ही पुलिस को इस बात की भनक लगी कि कार क्रमांक MP 36 BB 5555 में सवार युवक किसी बड़ी वारदात की फिराक में हो सकते हैं, गढ़ा पुलिस ने बिना वक्त गंवाए घेराबंदी शुरू कर दी. अस्पताल परिसर जैसी जगह पर जहाँ लोग जीवन की गुहार लेकर आते हैं, वहाँ मौत का सामान लेकर घूम रहे इन बदमाशों की खबर ने हर किसी के रोंगटे खड़े कर दिए.

पुलिस की टीम ने जब न्यूरो सर्जन विभाग के पास इस लग्जरी पजेरो को चारों तरफ से घेरा, तो कार के भीतर मौजूद युवकों ने भागने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद जवानों ने उन्हें मौके पर ही दबोच लिया. जब गाड़ी से उतारकर उनसे कड़ाई से पूछताछ की गई और उनकी तलाशी ली गई, तो पुलिस के हाथ जो लगा उसने इलाके में दहशत फैला दी. आरोपियों के पास से एक घातक पिस्टल और दो जिंदा कारतूस बरामद किए गए. पकड़े गए युवकों की पहचान मोहम्मद शहबाज, पिता अकरम खान और अभिषेक यादव के रूप में हुई है, जो मूलतः पड़ोसी जिले नरसिंहपुर के करेली क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं. अब सवाल यह उठता है कि आखिर नरसिंहपुर से आकर ये युवक जबलपुर के मेडिकल कॉलेज में लोडेड पिस्टल के साथ क्या कर रहे थे? क्या इनके निशाने पर कोई डॉक्टर था, या फिर किसी पुराने विवाद का बदला लेने के लिए इन्होंने अस्पताल परिसर को चुना था?

इस गिरफ्तारी के बाद से ही पूरे जबलपुर में चर्चाओं का बाजार गर्म है और लोगों के मन में कई तरह की जिज्ञासाएं जन्म ले रही हैं. पजेरो जैसी महंगी गाड़ी और उसमें छिपाकर रखा गया अवैध हथियार किसी बड़े आपराधिक सिंडिकेट की ओर इशारा कर रहा है. गढ़ा पुलिस अब इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि इन युवकों का पिछला रिकॉर्ड क्या है और ये पिस्टल इनके पास कहाँ से आई. अस्पताल में मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो काले रंग की यह पजेरो काफी देर से संदिग्ध परिस्थितियों में चक्कर काट रही थी, जिससे लोगों के बीच पहले ही असुरक्षा का माहौल बन गया था. पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने यकीनन एक संभावित बड़ी वारदात को टाल दिया है, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह हथियारों के साथ बेखौफ घूमते अपराधियों ने प्रशासन के सामने नई चुनौती पेश कर दी है.

वर्तमान में दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर उनसे गुप्त स्थान पर पूछताछ की जा रही है. पुलिस सूत्रों का कहना है कि मोबाइल कॉल डिटेल्स और उनके संपर्कों को खंगाला जा रहा है ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि जबलपुर में उनका मददगार कौन था. क्या यह किसी गैंगवार की शुरुआत थी या फिर किसी निजी रंजिश का नतीजा, यह तो जांच के बाद ही साफ हो पाएगा. फिलहाल, मेडिकल कॉलेज परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पुलिस ने साफ कर दिया है कि शहर की शांति भंग करने की कोशिश करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. जनता अब पुलिस के अगले खुलासे का बेसब्री से इंतजार कर रही है कि आखिर इस वीआईपी कार और पिस्टल के पीछे की असली कहानी क्या है.

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