जबलपुर. सुबह जबलपुर जिले के पाटन तहसील क्षेत्र में किसान संगठनों का एक बड़ा और संगठित प्रदर्शन देखने को मिला, जिसने इलाके में जनजीवन ठप कर दिया. करीब 500 से अधिक ट्रैक्टरों के साथ किसान सड़कों पर उतरे और मुख्य मार्गों को घेरते हुए लंबा जाम लग गया, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें खड़ी हो गईं और कई घंटों तक आवागमन प्रभावित रहा. किसानों के इस आंदोलन ने प्रशासन और सरकार के समक्ष नए राजनीतिक और आर्थिक सवाल खड़े कर दिए हैं.
सुबह से ही पाटन तहसील के ग्रामीण इलाकों से सैकड़ों किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ पहुंचे और धीरे-धीरे प्रदर्शन के पैमाने में वृद्धि हुई. ट्रैक्टरों की कतारें इतनी लम्बी थी कि वे मुख्य चौराहों से होते हुए आसपास के मार्गों तक फैल गईं और स्थानीय बस मार्गों सहित राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी अवरुद्धता बनी रही. किसानों ने जोरदार नारों के बीच अपने सभी वाहनों को धरना स्थल पर रोक दिया और प्रदर्शन तेज करने के इरादे जाहिर किए.
किसानों की मांगें मुख्यतः कृषि लागत, फसल मूल्य, मंडी व्यवस्था और फसल बीमा से जुड़ी गंभीर समस्याओं पर केन्द्रित थीं. उनके बैनरों पर लिखा था कि वे लंबे समय से बीज, खाद, उर्वरक, बिजली दरों, कर्ज माफी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी दर्जा देने जैसी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पिछले कई महीनों से संबंधित विभागों एवं अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने के बावजूद कोई समाधान नहीं मिल पाया, जिसके कारण उन्हें यह रास्ता अपनाना पड़ा.
किसान नेताओं ने कहा कि अगर सरकार ने उनकी मांगों पर तत्काल प्रभाव से सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो वे इस आंदोलन को और बड़ा करेंगे और इसे तहसील-स्तर से लेकर राज्य-स्तर तक फैलाएंगे. किसानों ने यह भी कहा कि उम्र बढ़ने और लगातार लागत वृद्धि के बावजूद उन्हें किसानों को लाभ के बजाय घाटा ही मिल रहा है. उन्होंने कहा कि एक किसान के लिए खेती अब घाटे का सौदा बन चुकी है और ऐसे में अपने परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल होता जा रहा है.
स्थानीय प्रशासन ने यातायात सुचारू रखने के लिए कई उपाय किए, फिर भी ट्रैक्टरों की लंबी कतारों के कारण पाटन क्षेत्र में दृश्य अत्यधिक जाम जैसा रहा. पटन चौराहा, गाँव और जिला मुख्यालयों तक जाने वाले मार्गों पर वाहनों की आवाजाही घट गई और मोटरसाइकिल, ऑटो रिक्शा और टैक्सियों सहित तमाम प्राइवेट वाहनों को भी लंबा इंतजार करना पड़ा. कई स्थानों पर पुलिस ने वाहनों को वैकल्पिक मार्गों की ओर मोड़ने की भी कोशिश की, लेकिन भारी ट्रैक्ट्रर जाम के कारण स्थिति नियंत्रण से बाहर दिखी.
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने न केवल आर्थिक नारों को बुलंद किया, बल्कि केंद्र और राज्य दोनों सरकारों पर यह आरोप भी लगाया कि वे वास्तविक समस्याओं को नजरअंदाज कर रहे हैं. कुछ किसानों ने कहा कि सरकारें केवल चुनावी वक्तव्य देती हैं, लेकिन जमीन पर किसानों की दिक्कतों को नहीं समझतीं. उनका कहना था कि अगर फसल का MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) प्रभावी ढंग से लागू होता, तो किसानों को बाजार में उचित मूल्य मिलता और आर्थिक संकट की यह स्थिति नहीं बनती.
पाटन तहसील कार्यालय और जिला प्रशासन कार्यालय ने फिलहाल मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे किसानों की मांगों को समझते हैं और संबंधित विभागों के साथ मिलकर बातचीत करेंगे. प्रशासन ने यह भी जोड़ा कि किसानों को शांतिपूर्ण ढंग से अपना प्रदर्शन करने की अनुमति है, बशर्ते किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो. अधिकारियों ने कहा कि किसानों से बातचीत जारी है और जल्द ही समाधान निकालने का प्रयास होगा.
इस प्रदर्शन ने राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है. विपक्षी दलों ने सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि इस प्रकार के आंदोलन यह संकेत देते हैं कि आम आदमी और विशेष रूप से किसान वर्ग के साथ सरकारें गंभीरता से व्यवहार नहीं कर रही हैं. वहीं, सत्ताधारी दल के नेताओं का कहना है कि किसानों का हित सर्वोपरि है और सभी मांगों को विभागीय स्तर पर शीघ्रता से देखा जाएगा.
सड़कों पर लंबे समय तक खड़े ट्रैक्टर और किसानों का रोष, सामाजिक मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी चर्चा का केन्द्र बना हुआ है. स्थानीय फेसबुक ग्रुप्स और ट्विटर (X) हैंडल्स पर प्रदर्शन के वीडियोज़ और तस्वीरें साझा की जा रही हैं, जिनमें किसानों के नारों, ट्रैक्टरों की कतारों और भीड़-भाड़ के दृश्य शामिल हैं. इन पोस्टों में कुछ लोग किसानों के समर्थन में दिख रहे हैं, तो कुछ जनता को हो रही कठिनाइयों को लेकर चिंता व्यक्त कर रहे हैं.
विश्लेषकों का कहना है कि पाटन क्षेत्र में हुआ यह प्रदर्शन सिर्फ एक स्थानीय मामला नहीं रहा, बल्कि यह मध्य प्रदेश के ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि संकट की बड़ी तस्वीर को उजागर करता है. अगर समय रहते समाधान नहीं निकला, तो यह आंदोलन अन्य जिलों तक फैलकर और व्यापक रूप ले सकता है.
आज पाटन तहसील में किसानों का 500 ट्रैक्टरों के साथ किया गया प्रदर्शन प्रशासन, सरकार और समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े करता है. यह आंदोलन किसानों की मूलभूत समस्याओं की तरफ ध्यान खींचने का एक प्रयास है और आने वाले दिनों में इस पर क्या कार्रवाई होती है, यह तय करेगा कि आगे राजनीतिक और सामाजिक माहौल कैसा बना रहेगा.
