जबलपुर. मध्य प्रदेश में धान उपार्जन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और किसानों के हक पर डाका डालने वाले बिचौलियों पर नकेल कसने के लिए जबलपुर प्रशासन ने एक बेहद सख्त और आधुनिक रणनीति तैयार की है. जिला आपूर्ति नियंत्रक प्रमोद कुमार मिश्रा ने मंगलवार दोपहर 2:00 बजे प्रशासनिक अमले के साथ हुई बैठक के बाद इस नई व्यवस्था का औपचारिक खुलासा किया. शासन के निर्देशानुसार अब जिले के मझौली समेत सभी धान उपार्जन केंद्रों की चौबीसों घंटे निगरानी के लिए कोटवारों की विशेष नियुक्ति कर दी गई है. इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अब ये कोटवार केवल केंद्रों पर पहरेदारी ही नहीं करेंगे बल्कि अपने मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर खरीदी केंद्रों की हर गतिविधि की वीडियोग्राफी भी करेंगे. प्रशासन का मानना है कि तकनीक के इस इस्तेमाल से फर्जी तरीके से धान खपाने वाले गिरोहों और अवैध परिवहन करने वाले बिचौलियों के मंसूबों पर पूरी तरह पानी फिर जाएगा.
जिला आपूर्ति नियंत्रक के अनुसार सुरक्षा और निगरानी के मापदंडों को बेहद कड़ा किया गया है जिसके तहत मझौली क्षेत्र के प्रत्येक उपार्जन केंद्र पर दिन के समय दो और रात के समय चार कोटवारों की तैनाती सुनिश्चित की गई है. रात के समय कोटवारों की संख्या दोगुनी रखने का उद्देश्य यह है कि अंधेरे का फायदा उठाकर कोई भी बाहरी व्यक्ति या अनाधिकृत वाहन केंद्र में प्रवेश न कर सके. इन कोटवारों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे उपार्जन केंद्रों पर लगातार उपस्थित रहेंगे और वहां आने वाले हर ट्रक ट्रैक्टर और ट्राली की वीडियोग्राफी करेंगे. यदि केंद्र पर किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि या बिचौलियों की सक्रियता नजर आती है तो कोटवार इसकी जानकारी तुरंत संबंधित एसडीएम (अनुविभागीय अधिकारी राजस्व) और स्थानीय थाना प्रभारी को देंगे. यह सीधा संचार तंत्र इसलिए विकसित किया गया है ताकि सूचना मिलते ही पुलिस और राजस्व की टीम मौके पर पहुंचकर तत्काल कार्रवाई कर सके और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे.
इस बार प्रशासन का मुख्य फोकस 'अनुचित लाभ' लेने वाले बिचौलियों पर है जो अक्सर सस्ते दामों पर धान खरीदकर केंद्रों पर ऊंचे समर्थन मूल्य पर बेचने की कोशिश करते हैं. कोटवारों द्वारा बनाई जाने वाली वीडियो फुटेज एक पुख्ता साक्ष्य के रूप में काम करेगी जिससे केंद्र पर आने वाले किसानों की पहचान और उनकी उपज की वास्तविकता की जांच की जा सकेगी. इस निर्णय से जहां ईमानदार किसानों में खुशी की लहर है वहीं बिचौलियों और केंद्र संचालकों में हड़कंप मच गया है क्योंकि अब पल-पल की रिपोर्ट सीधे जिला मुख्यालय और वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचेगी. धान खरीदी के इस महाभियान में कोटवारों को अब प्रशासन की 'आंख और कान' की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है जिससे व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ेगी. प्रशासन ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी केंद्र पर कोटवारों की ड्यूटी में लापरवाही पाई जाती है या उनके द्वारा दी गई जानकारी में असत्यता मिलती है तो संबंधित कर्मियों पर भी कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. कुल मिलाकर जबलपुर जिले में धान उपार्जन को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए सरकार ने अब मैदानी स्तर पर सबसे निचले लेकिन सबसे प्रभावी सुरक्षा चक्र यानी कोटवारों को मोर्चे पर तैनात कर दिया है.
