जबलपुर. सहायक प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व ट्यूटर के कुल 286 पदों पर महिला उम्मीदवारों को दिए जा रहे 100 प्रतिशत आरक्षण को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है. याचिका में कोर्ट को बताया गया कि भर्ती प्रक्रिया में पुरुष उम्मीदवारों को शामिल नहीं किया गया है और सभी पदों पर केवल महिला उम्मीदवारों को ही आरक्षण दिया गया है. मामले पर 29 दिसंबर को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब-तलब करते हुए निर्देश दिए थे.
हाईकोर्ट की प्रिंसिपल बेंच में मामले पर आज दोबारा सुनवाई हुई. इस दौरान सरकार की ओर से मौखिक रूप से बताया गया कि अब भर्ती प्रक्रिया में पुरुष उम्मीदवारों को भी शामिल करने का निर्णय लिया गया है. 6 जनवरी को ही सुनवाई में मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल की ओर से अधिवक्ता राहुल दिवाकर ने मौखिक रूप से कोर्ट को अवगत कराया है कि भर्ती प्रक्रिया में अब पुरुष उम्मीदवारों को शामिल करने का निर्णय लिया है.
किंतु लिखित निर्देश की प्रति अभी तक अप्राप्त है. इस पर याचिकाकर्ताओं की और से अधिवक्ता विशाल बघेल ने कोर्ट को बताया कि आवेदन करने की अंतिम तिथि 7 जनवरी है. इस तिथि के बाद पुरुष उम्मीदवार आवेदन नहीं कर सकेंगे. सुनवाई के बाद कोर्ट ने शासन के निर्णय को लिखित में रिकार्ड में प्रस्तुत करने हेतु एक दिन का समय देते हुए प्रकरण को 7 जनवरी को टॉप आफ दा लिस्ट सूचीबद्ध करने के आदेश दिए हैं.
गौरतलब है कि जबलपुर निवासी नौशाद अली एवं अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विशाल बघेल ने याचिका दाखिल कर कोर्ट को बताया कि प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में 286 अकादमिक पदों पर सीधी भर्ती से 40 एसोसिएट प्रोफेसर, 28 असिस्टेंट प्रोफेसर व 218 सिस्टर ट्यूटर की भर्ती की जानी है. इन भर्तियों में पुरुष उम्मीदवारों को पूरी तरह बाहर कर दिया था. जबकि भर्ती नियम तथा अपेक्स काउंसिल आईएनसी के सभी मापदंड लिंग भेद की अनुमति नहीं देते हैं. इस सबके बावजूद लोक स्वास्थ्य कल्याण विभाग द्वारा की जा रही भर्ती में संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 व भर्ती के नियमों की अनदेखी की जा रही थी.
याचिका में आरोप लगाया है कि सरकार की ये भर्ती प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी मामले के 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा का उल्लंघन किया है. संविधान के अनुच्छेद 16(2) के तहत यह प्रत्यक्ष रूप से लिंग भेदभाव है. याचिका में मांग की है कि 100 प्रतिशत महिला आरक्षण को असंवैधानिक घोषित कर याचिकाकर्ताओं को भर्ती प्रक्रिया में सम्मिलित किया जाए. 6 जनवरी को हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान मंडल ने याचिकाकर्ताओं की मांगों को मानते हुए पुरुष उम्मीदवारों को भी शामिल करने के लिए मौखिक सहमति व्यक्त की है. अब कल होने वाली सुनवाई में पुरुषों की उम्मीदवारी और पात्रता पर अंतिम निर्णय हो सकेगा.
