खेल का मंच या कॉरपोरेट ग्रीनवॉशिंग? अरामको की स्पॉन्सरशिप से FIFA और ICC की साख पर अंतरराष्ट्रीय दबाव


 लंदन/दोहा। दुनिया के सबसे बड़े खेल संगठन—FIFA, ICC और Formula 1—इन दिनों विवादों में घिरे हैं। वजह है उनकी अरबों डॉलर की साझेदारी सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको के साथ।

संगठनों की चिट्ठी, FIFA-ICC की चुप्पी

दस बड़े मानवाधिकार और जलवायु संगठनों ने 15 सितंबर 2025 को FIFA, ICC, Formula 1, Concacaf, Aston Martin और Dakar Rally के आयोजकों को चिट्ठी लिखी।
सवाल था: क्या अरामको जैसी प्रदूषण फैलाने वाली कंपनी को खेलों का चेहरा बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकार मानकों का उल्लंघन नहीं है?
लेकिन तय समय सीमा बीत जाने के बावजूद किसी ने कोई जवाब नहीं दिया।

तेल का पैसा, खेल की चमक

अरामको दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी है और साफ कहती है कि “तेल-गैस का दौर खत्म नहीं होगा।”

  • 2021–23 के बीच कंपनी ने विज्ञापनों पर करीब 200 मिलियन डॉलर खर्च किए।

  • आज उसका स्पॉन्सरशिप पोर्टफोलियो 1.3 बिलियन डॉलर से ऊपर है।

  • इस हफ्ते के सिंगापुर ग्रां प्री और महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप में उसकी ब्रांडिंग साफ दिख रही है।

  • आने वाले वर्षों में FIFA World Cup और ICC T20 World Cup में वह “Major Worldwide Partner” के रूप में मौजूद होगी।

खिलाड़ियों और प्रशंसकों का विरोध

खिलाड़ियों और फैंस ने खुलकर विरोध जताया है।

  • डच स्टार विवियाने मीडेमा और कैनेडियन कप्तान जेसी फ्लेमिंग सहित 135 प्रोफेशनल फुटबॉलर्स ने FIFA से अरामको से रिश्ता तोड़ने की मांग की।

  • डेनमार्क की सोफी जुंगे पेडर्सन बोलीं: “खेल अरामको के साथ खड़े होकर महिलाओं और धरती के खिलाफ अन्याय को छुपा नहीं सकता।”

  • न्यूज़ीलैंड की कैटी रूड ने कहा: “कोई भी खेल इतना बड़ा नहीं कि उसके नाम पर मानवाधिकार उल्लंघन और जलवायु विनाश को नज़रअंदाज़ किया जाए।”

ग्रीनवॉशिंग का आरोप

आलोचकों का कहना है कि अरामको खेलों का इस्तेमाल सिर्फ अपनी छवि सुधारने (ग्रीनवॉशिंग) के लिए कर रहा है, जबकि हकीकत यह है कि जीवाश्म ईंधन वैश्विक कार्बन उत्सर्जन के 80% के लिए जिम्मेदार हैं।


मानवाधिकार का काला पहलू

यह विवाद सिर्फ पर्यावरण तक सीमित नहीं है।

  • NGOs का कहना है कि अरामको का पैसा सऊदी पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड तक जाता है, जिस पर जमाल खशोगी की हत्या जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।

  • मार्च 2025 में अरामको स्टेडियम के निर्माण में एक पाकिस्तानी मजदूर की मौत ने हालात और बिगाड़ दिए।

नेताओं की दोहरी ज़ुबान

  • FIFA अध्यक्ष जियानी इंफैन्टिनो कहते हैं: “क्लाइमेट चेंज हमारी सबसे बड़ी चुनौती है।”

  • F1 बॉस Stefano Domenicali दावा करते हैं: “सस्टेनेबिलिटी हमारे खेल और बिज़नेस दोनों के लिए अहम है।”
    लेकिन सवाल यह है कि अगर सच में ऐसा है, तो फिर अरामको को गले लगाने की क्या मजबूरी है?

खेल हमें जोड़ते हैं, उम्मीद देते हैं। लेकिन जब वही खेल दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी की ब्रांडिंग का मंच बन जाएँ, तो सवाल उठना लाज़मी है।
FIFA और ICC जैसी संस्थाएँ दो चेहरे नहीं रख सकतीं—एक जो कहता है “हम जलवायु और मानवाधिकार की परवाह करते हैं” और दूसरा जो दुनिया के सबसे बड़े प्रदूषक का हाथ थामे खड़ा है।

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