जबलपुर. मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में फर्जी जाति प्रमाण पत्र और अन्य सरकारी दस्तावेज तैयार किए जाने के गंभीर मामले का खुलासा होने के बाद प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए एक एमपी ऑनलाइन सेंटर को सील कर दिया है। यह कार्रवाई शिकायत मिलने के बाद की गई, जिसने एक बार फिर सरकारी योजनाओं और आरक्षण व्यवस्था में सेंध लगाने वाले फर्जीवाड़े की पोल खोल दी है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक जांच में कई ऐसे दस्तावेज बरामद हुए हैं, जो प्रथम दृष्टया फर्जी प्रतीत हो रहे हैं और जिनका उपयोग सरकारी लाभ लेने के लिए किया जा सकता था।
जानकारी के अनुसार एमपी ऑनलाइन सेंटर में फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनाए जाने की शिकायत जिला प्रशासन तक पहुंची थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने तत्काल अधारताल और रांझी एसडीएम को पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए। इसके बाद पुलिस बल के साथ एक संयुक्त टीम का गठन किया गया, जिसने घमापुर क्षेत्र में स्थित मलिक एसोसिएट नामक एमपी ऑनलाइन सेंटर पर छापा मारा। जांच के दौरान टीम को बड़ी संख्या में संदिग्ध दस्तावेज मिले, जिससे यह आशंका और मजबूत हो गई कि यहां संगठित तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे।
छापे के दौरान जो दस्तावेज सामने आए हैं, उनमें विभिन्न स्कूलों के दाखिला-खारिज प्रमाण पत्र, प्राचार्यों के हस्ताक्षरित कागजात, फर्जी बीपीएल कार्ड और जाति प्रमाण पत्र शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि कई जाति प्रमाण पत्रों पर मौजूद हस्ताक्षर और मुहरें संदिग्ध हैं और वे असली रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहीं। इससे यह संदेह गहराया है कि इन दस्तावेजों का उपयोग नौकरी, शिक्षा, आरक्षण और सरकारी योजनाओं का अनुचित लाभ उठाने के लिए किया जा रहा था।
एसडीएम अधारताल पंकज मिश्रा ने बताया कि कलेक्टर के निर्देश पर रांझी एसडीएम आर.एस. मरावी और पुलिस बल के साथ मिलकर यह कार्रवाई की गई। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि सेंटर से फर्जी तरीके से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज तैयार किए गए हैं। चूंकि छापे के समय सेंटर का संचालक शहर से बाहर बताया गया, इसलिए फिलहाल एमपी ऑनलाइन सेंटर को सील कर दिया गया है, ताकि किसी भी प्रकार के साक्ष्य से छेड़छाड़ न हो सके।
प्रशासन का मानना है कि यह मामला केवल एक सेंटर तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह के सक्रिय होने की भी आशंका है। जिस तरह से अलग-अलग स्कूलों के प्रमाण पत्र, हस्ताक्षरित कागजात और बीपीएल कार्ड बरामद हुए हैं, उससे यह संकेत मिलता है कि फर्जीवाड़े का यह नेटवर्क काफी व्यापक हो सकता है। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि सभी दस्तावेजों की फॉरेंसिक और विभागीय जांच कराई जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन-किन लोगों ने इन फर्जी दस्तावेजों का लाभ उठाया है।
इस पूरे प्रकरण ने प्रशासनिक तंत्र और आम जनता के बीच चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि जाति प्रमाण पत्र और बीपीएल कार्ड जैसे दस्तावेज सीधे तौर पर सामाजिक न्याय और सरकारी कल्याण योजनाओं से जुड़े होते हैं। यदि ऐसे दस्तावेज फर्जी तरीके से बनाए जाते हैं तो इससे वास्तविक जरूरतमंदों और पात्र लोगों के अधिकारों का हनन होता है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत सामने आने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्हें किसी भी एमपी ऑनलाइन सेंटर या अन्य माध्यम से फर्जी दस्तावेज बनाए जाने की जानकारी मिले तो तुरंत इसकी सूचना प्रशासन या पुलिस को दें। समय रहते सूचना मिलने से ऐसे मामलों पर प्रभावी कार्रवाई की जा सकती है और धोखाधड़ी करने वालों को रोका जा सकता है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ने पर उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तारी भी की जा सकती है।
इस कार्रवाई के बाद जिले के अन्य एमपी ऑनलाइन सेंटरों में भी हड़कंप मच गया है। माना जा रहा है कि प्रशासन अब अन्य सेंटरों की भी जांच कर सकता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं और भी इस तरह की अवैध गतिविधियां तो नहीं चल रही हैं। प्रशासन का कहना है कि सरकारी सेवाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए इस तरह की सख्त कार्रवाई जरूरी है।
जबलपुर में एमपी ऑनलाइन सेंटर पर की गई यह कार्रवाई एक कड़ा संदेश है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने और सरकारी व्यवस्था का दुरुपयोग करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है, क्योंकि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और कई अहम कड़ियों का खुलना बाकी है।
